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अब Voter Card को Aadhar से लिंक करना है जरूरी, मिलेगें ये बडे फायदे
 
Voter and Aadhar

Voter ID-Aadhaar Link: अब वोटर आईडी को भी आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा. देशभर में आज से कई राज्यों में वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने का काम शुरू हो रहा है. महाराष्ट्र और त्रिपुरा समेत कई राज्यों में आज से चुनाव आयोग कैंपेन चला रहा है, जिसके तहत वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा. चुनाव आयोग का दावा है कि वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने पर इलेक्टोरल रोल में डुप्लीकेसी को रोका जा सकेगा. 

पहली बार 2015 में चुनाव आयोग ने वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने की योजना पर काम शुरू किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना पर रोक लगा दी थी. बाद में 2019 में चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार से जुड़ी कुछ सिफारिशें केंद्र सरकार को दी थी. इन सिफारिशों में से एक सिफारिश वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की भी थी.

चुनाव में सुधार के लिए मोदी सरकार चुनाव कानून में संशोधन को लेकर बिल लेकर आई थी. ये बिल संसद से पास हो चुका है और अब कानून बन चुका है. कानून बनने के बाद वोटर आईडी और आधार कार्ड को लिंक करने का रास्ता साफ हो गया है. 

हालांकि, वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कुछ महीनों का समय लग सकता है. त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. यहां 27 लाख वोटर हैं. त्रिपुरा के मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक, दो महीने में सभी लोगों का वोटर आईडी आधार कार्ड से लिंक करने का टारगेट है. 

वोटर आईडी-आधार लिंक से फायदा क्या?

इससे चुनावों में धांधली रोकने में मदद मिलेगी. कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं, जिसमें एक ही व्यक्ति कई बार वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लेता था, जिससे चुनावों में धांधली होती थी. लेकिन आधार कार्ड एक ही है, इसलिए कोई भी व्यक्ति एक ही बार अपना नाम दर्ज करवा सकेगा.

वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने के दो बड़े फायदे होंगे. पहला तो ये कि एक व्यक्ति एक ही बार अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करवा सकेगा. इससे डुप्लीकेसी रुकेगी. दूसरा ये कि फर्जी वोटर आईडी बनाने पर लगाम लगाई जा सकेगी.

अगर आधार नहीं है तो फिर?

इस कानून में लिखा है कि वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करवाना जरूरी है. लेकिन इसमें ये भी साफ किया गया है कि अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं है तो उसे इलेक्टोरल रोल में शामिल करने से नहीं रोका जा सकता. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कोई दूसरे दस्तावेज जमा कराने होंगे. 

इसका बिल संसद में पेश करते समय कानून मंत्री किरन रिजिजू ने भी साफ किया था कि आधार को लिंक कराना वैकल्पिक होगा. अगर कोई व्यक्ति चाहेगा, तभी उसका वोटर आईडी आधार से लिंक किया जाएगा.

चुनाव कानून में दो और बड़े बदलाव

चुनाव कानून में मोदी सरकार ने तीन बड़े बदलाव किए हैं. पहला बदलाव तो वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का ही है. इसके अलावा दो और बड़े बदलाव हैं...

- पहलाः अब वोटर लिस्ट में साल में 4 बार नाम दर्ज करवा सकते हैं. पहले 1 जनवरी कट ऑफ डेट हुआ करती थी. अगर 2 जनवरी को कोई 18 साल का पूरा हो रहा है तो उसे वोटर लिस्ट में नाम लिखवाने के लिए सालभर इंतजार करना होता था. लेकिन अब चार बार 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को नाम रजिस्टर करवा सकेंगे. 

- दूसराः इस कानून को 'जेंडर न्यूट्रल' बनाया गया है. इससे महिला कर्मचारियों के पति भी सर्विस वोटर में शामिल हो सकेंगे. अभी तक ऐसा नहीं था. मसलन, पुरुष फौजी की पत्नी सर्विस वोटर के तहत अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकती थी, लेकिन महिला फौजी के पति ऐसा नहीं कर सकते थे. इसके लिए अब 'पत्नी' शब्द की जगह पर 'पति या पत्नी' लिखा जाएगा.