शादी से पहले अगर हर मां अपनी बेटी को सिखाएं ये बातें, लाडली को ससुराल में कभी नहीं होगी दिक्कत

इस बात में कोई दोराय नहीं कि भारत में होने वाली शादियां किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि रिश्ता पक्का होते ही न केवल घरवाले तैयारियों में जुट जाते हैं बल्कि मेहमानों से लेकर खाने-पीने तक की चीजों की लिस्ट भी बनकर तैयार हो जाती है। हालांकि, ऐसा हो भी क्यों न शादी दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन है। तभी तो कहा भी गया है कि शादी के बाद लड़का-लड़की का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है। खासकर, शादी के बाद लड़कियों के जीवन में बहुत सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पत्नी बनने के साथ ही वह बहू-भाभी, चाची और मामी जैसे रिश्तों में भी बंध जाती है।

उसे न केवल अपने ससुराल वालों के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है बल्कि उसे छोटी-छोटी बातों का ख्याल भी रखना पड़ता है। हालांकि, कुछ लड़कियां जहां शुरूआत में ही अपने ससुराल वालों का दिल जीतने में कामयाब हो जाती हैं, तो कइयों को बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिसका सबसे बड़ा कारण उन्हें पता ही नहीं होता कि पति के घर जाकर उन्हें किस तरह से बिहेव करना है। हां, वो बात अलग है कि शादी होने से पहले अगर हर मां अपनी बेटी को कुछ तौर-तरीके सीखा दे, तो चीजें बहुत हद तक सही हो सकती हैं।

घर की जिम्मेदारी संभालना

अगर बहुत जल्द आपकी बेटी की शादी होने वाली है, तो उसे सिखाएं कि शादी के बाद ससुराल ही उसका घर है, जहां उसको तमाम तरह की जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती हैं। यही नहीं, सुसराल में मायके जितना आराम तो नहीं मिलने वाला, ऐसे में अपनी बेटी को बता दें कि वहां उसे घर के बहुत सारे काम करने पड़ेंगे। ऐसे में संयम और धैर्य से काम लेना होगा। यही नहीं, बेटी को अपनी सास की मदद करने की भी सलाह दें।

बड़ों का सम्मान

इस बात में कोई दोराय नहीं कि एक अजनबी परिवार में रहना बहुत मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां के न केवल तौर-तरीके सीखने में समय लग जाता है बल्कि यह भी नहीं पता होता कि किससे क्या कहना है।

ऐसे में अगर घर का बड़ा आपको किसी चीज के लिए डांट भी दे, तो उसे कभी भी जवाब न दें। इतना ही नहीं, बेटी को शादी से पहले ये बात सिखाएं कि वहां जाकर उसे हर किसी का आदर करना है। सास ससुर भी उसके माता पिता हैं, जिनका सम्मान करना बहुत ज्यादा जरूरी है।

झट से कोई राय न बनाएं

शादी के बाद सास और बहू दोनों को ही समझने में वक्त लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह दोनों ही एक-दूसरे के बारे में ज्यादा नहीं जानती हैं। ऐसे में अपनी बेटी को बताएं कि अगर उसकी सास किसी बात पर अपनी रजामंदी नहीं देती हैं, तो एकदम से राय न बनाएं। उनकी बात को समझने की कोशिश करें। उन्हें भी अपनी बात समझाएं और एक-दूसरे को समझने के लिए वक्त लें।

ससुराल का रहन-सहन सीखें

यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि मायके-ससुराल का रहन-सहन बहुत अलग होता है। ऐसे में अपनी बेटी को बटाएं ससुराल के रहन-सहन के मुताबिक खुद को ढ़ालें। वहां न केवल अपनी सास का हाथ बताएं बल्कि उनसे वहां के तौर-तरीके भी सीखें।

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