विदेश मंत्री बोले- इस फसल से किसानों की आय में होगी वृद्धि, देश भी बनेगा आत्मनिर्भर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की अध्यक्षता में गुरुवार को उच्चायुक्तों और राजदूतों के बीच, अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष का प्री-लांचिंग उत्सव का आयोजन किया गया. दिल्ली में आयोजित इस उत्सव में डॉ. जयशंकर ने कहा कि मिलेट्स आत्मनिर्भरता में सुधार करेगा. साथ ही विकेंद्रीकृत उत्पादन को बढ़ावा देगा और किसानों की आय में वृद्धि करेगा. इस प्रकार वे वैश्विक खाद्य सुरक्षा के जोखिम को कम करेंगे. भारत की कल्पना के अनुरूप यह वर्ष जागरूकता और उपयोग के मायने में वास्तव में वैश्विक साझेदारी है.

उन्होंने कहा कि कोविड, जलवायु परिवर्तन और संघर्षों की पृष्ठभूमि में आज दुनिया में मिलेट्स की प्रासंगिकता बढ़ रही है. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि पोषक-अनाज खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है. विदेश मंत्री ने कहा कि कोविड एक ऐसा दौर था, जिसने दुनिया को याद दिलाया कि एक महामारी खाद्य सुरक्षा के लिए क्या कर सकती है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पादन कम हो सकता है और व्यापार बाधित हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में खाद्य सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए.

विटामिन व खनिजों का भंडार है

वहीं, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष (आईवाईओएम) घोषित किया है. इसके माध्यम से मिलेट की घरेलू व वैश्विक खपत बढ़ाना हमारा उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि यह वर्ष वैश्विक उत्पादन बढ़ाने, कुशल प्रसंस्करण तथा फसल रोटेशन के बेहतर उपयोग एवं फूड बास्केट के प्रमुख घटक के रूप में मिलेट को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगा. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, सभी राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारक संस्थानों के साथ मिलकर मिलेट्स का उत्पादन तथा खपत बढ़ाने के लिए मिशन मोड में काम कर रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मिलेट्स सूक्ष्म पोषक तत्वों, विटामिन व खनिजों का भंडार है.

मिलेट सुरक्षित वातावरण में भी योगदान देता है

कृषि मंत्री के मुताबिक, आईवाईओएम, खाद्य सुरक्षा व पोषण के लिए मिलेट्स के योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा व सतत उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के लिए हितधारकों को प्रेरित करेगा एवं अनुसंधान तथा विकास सेवाओं में निवेश बढ़ाने के लिए ध्यान आकर्षित करेगा. शाकाहारी खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के दौर में मिलेट वैकल्पिक खाद्य प्रणाली प्रदान करता है. मिलेट संतुलित आहार के साथ-साथ सुरक्षित वातावरण में भी योगदान देता है. उन्होंने कहा कि ये मानव जाति के लिए प्रकृति के उपहार हैं. कम पानी की खपत, कम कार्बन उत्सर्जन व सूखे में भी जलवायु अनुकूल मिलेट को उगाया जा सकता है. भारत के अधिकांश राज्य एक या अधिक मिलेट फसल प्रजातियों को उगाते हैं.

मिलेट को पोषण मिशन अभियान के तहत भी शामिल किया गया है

उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा स्थायी उत्पादन का समर्थन करने, उच्च खपत के लिए जागरूकता पैदा करने, मंडी व मूल्य श्रृंखला विकसित करने तथा अनुसंधान-विकास गतिविधियों के लिए वित्तपोषण भी किया जा रहा है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत, मिलेट के लिए पोषक अनाज घटक 14 राज्यों के 212 जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा. साथ ही, राज्यों के जरिये किसानों को अनेक सहायता दी जाती है. मिलेट के पोषण महत्व के मद्देनजर सरकार ने अप्रैल-2018 में इसे पोषक-अनाज के रूप में अधिसूचित किया था और मिलेट को पोषण मिशन अभियान के तहत भी शामिल किया गया है.

स्टार्ट-अप-उद्यमियों को भी सहायता दी जा रही है

तोमर ने बताया कि भारत में मिलेट मूल्यवर्धित श्रृंखला में 500 से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं, भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान ने आरकेवीवाई-रफ्तार में 250 स्टार्टअप को इनक्यूबेट किया है. 66 से अधिक स्टार्टअप्स को सवा छह करोड़ रु. से ज्यादा दिए गए हैं. वहीं 25 स्टार्टअप्स को भी राशि की की मंजूरी दी है. मिलेट की खपत बढ़ाने वाले व्यंजनों व मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए स्टार्ट-अप-उद्यमियों को भी सहायता दी जा रही है.

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