खाद्य तेल की कीमतों में मिल सकती है राहत, खाद्य सचिव ने दिया अनुमान

आने वाले समय में खाद्य तेल की कीमतों में और राहत मिल सकती है. दरअसल खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने विदेशी बाजारों के संकेतों को देखते हुए ये अनुमान जताया है. देश में पिछले कुछ माह में खाद्य तेल की कीमतों में कुछ कटौती की गई है. लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तरों पर ही हैं. खादय सचिव ने विदेशी संकेतों को देखते हुए संवाददाताओं से कहा है कि विदेशी बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. इससे उम्मीद बन गई है कि आने वाले समय में खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी. हाल के दिनों में विदेशी बाजारों में खाद्य तेल की कीमतें घटी हैं. लेकिन जाड़े और शादियों की मांग की वजह से घरेलू बाजारों में खुदरा कीमतों में और राहत नहीं मिली है. ऐसे में आने वाले समय में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है.

फिलहाल क्यों नहीं घट रहे भाव

बाजार सूत्रों ने कहा कि खुदरा और थोक बाजार में सूरजमुखी और सोयाबीन तेल आयात भाव के मुकाबले भारी अंतर से महंगे बिक रहे हैं. सूरजमुखी तेल का भाव लगभग 25 प्रतिशत ऊंचे में मिल रहा है जबकि सोयाबीन तेल लगभग 10 प्रतिशत ऊंचा बिक रहा है. जबकि विदेशी बाजारों में सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल से 35 डॉलर प्रति टन नीचे हो गया है. वहीं सूरजमुखी तेल में तेजी का कारण इसके स्थानीय उत्पादन का नहीं होना और कोटा प्रणाली की वजह से आयात पर्याप्त मात्रा में नहीं होना है.

इसी कम तेल आपूर्ति के कारण सोयाबीन तेल भी लगभग 10 प्रतिशत महंगा बिक रहा है. वहीं बजट पूर्व बैठक में किसान संगठनों ने कहा कि सरकार को पामतेल के बजाय सोयाबीन, सरसों, मूंगफली और सूरजमुखी जैसे स्थानीय तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए जिससे खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटे और कीमतें नियंत्रण में रहें.

खाद्य तेलों पर आयात खर्च बढ़ा

वहीं हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार भारत का खाद्य तेलों के आयात पर खर्च अक्टूबर, 2022 को समाप्त होने वाले तेल वर्ष में 34.18 प्रतिशत बढ़कर 1.57 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि मात्रा के संदर्भ में यह 6.85 प्रतिशत बढ़कर 140.3 लाख टन रहा है. खाद्य तेल उद्योग निकाय एसईए ने यह जानकारी दी थी. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, दुनिया के प्रमुख वनस्पति तेल खरीदार देश भारत ने तेल वर्ष 2020-21 (नवंबर-अक्टूबर) में 1.17 लाख करोड़ रुपये का 131.3 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया था.

पहली दो तिमाहियों के दौरान आयात धीरे-धीरे बढ़ा और तीसरी तिमाही में यह धीमा हो गया. हालांकि, इंडोनेशिया द्वारा पाम तेल पर प्रतिबंध हटाने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज गिरावट के कारण चौथी तिमाही में यह फिर से बढ़ गया, जब भारत से खरीद में बढ़ोतरी हुई. एसईए के अनुसार, इस साल पाम तेल की कीमतों में अधिक घटबढ़ ने भारत की पाम तेल की खरीदारी को प्रभावित किया.

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