KVIC युवाओं के रोजगार देने के लिए शुरू किया ‘हनी मिशन’, आप भी ऐसे उठाएं इसका लाभ

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. खादी और ग्रामोद्योग आयोग नेअपने प्रमुख ‘हनी मिशन’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं के बीच मधुमक्खी के बक्से वितरित किए हैं. खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने मुरैना जिले में 10 लाभार्थियों को मधुमक्खी के 100 बक्से दिए. वहीं, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 20 लाभार्थियों के बीच 200 बक्से वतरित किए गए. इसी तरह महाराष्ट्र के जलगांव में 30 लाभार्थियों को मधुमक्खी के 300 बक्से दिए गए.

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के जवाब में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने पिछड़े और आदिवासी बहुल जिलों की पहचान की और लाभार्थियों को 600 बी-बॉक्स दिए. खास बात यह है खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के लिए 5 की ट्रेनिंग भी दी. केवीआईसी के अध्यक्ष ने केवीआईसी के सक्षम अधिकारियों को एक उचित विपणन मंच प्रदान करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान किए. कुमार ने लाभार्थियों को प्रदान की जाने वाली मौजूदा टूल किट के अलावा अतिरिक्त आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ शहद निकालने और मधुमक्खी बॉक्स परिवहन के उन्नत तरीकों के उपयोग के लिए नए दिशा-निर्देशों के विकास का भी निर्देश दिया.

सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को दिया जाए

वहीं, इस अवसर पर बोलते हुए, मनोज कुमार ने पहल की प्रशंसा की और कहा कि मधुमक्खी पालन में युवाओं को शामिल करने से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे और भारत के शहद उत्पादन में वृद्धि होगी, जो कि हनी मिशन का प्राथमिक लक्ष्य है. यह एक शानदार पहल है. उन्होंने कहा कि हमने आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है. अध्यक्ष ने छह एसएचजी समूहों की उन महिला लाभार्थियों की प्रशंसा की जो देश के संवेदनशील और दूरदराज के क्षेत्रों में काम करती हैं. उन्होंने इन महिलाओं की हर संभव मदद करने का भी वादा किया. साथ ही उन्होंने लाभार्थियों को भी आश्वासन दिया कि बातचीत के दौरान उठाए गए सभी मुद्दों को हल किया जाएगा. उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि हनी मिशन कार्यक्रम का लाभ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को दिया जाए.

इस प्रकार स्थानीय लोगों के लिए लाभदायक हैं

केवीआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनीत कुमार ने कहा कि मधुमक्खी पालन युवाओं को स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान के अनुरूप है. मधुमक्खी पालन से न केवल भारत का शहद उत्पादन बढ़ेगा बल्कि इससे मधुमक्खी पालकों की आय में भी वृद्धि होगी. इसके अलावा, मोम, पराग, प्रोपोलिस, शाही जेली और मधुमक्खी के जहर जैसे उत्पाद विपणन योग्य हैं और इस प्रकार स्थानीय लोगों के लिए लाभदायक हैं.

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