किसान ने सूखाग्रस्त क्षेत्र में लगाया सीताफल का बाग, अब हो रहा है लाखों का मुनाफा

औरंगाबाद के पैठण तालुका के कुछ इलाकों में किसान पिछले कई दिनों से कभी गीला सूखा तो कभी सूखे का संकट झेल रहे हैं. इसके चलते किसानों को कृषि में लगातार विफलता का सामना कर लड़ता है. लेकिन जिले के रहने वाले संजय कांसे ने दृढ़ संकल्प, सही योजना और कड़ी मेहनत से आधा एकड़ में सीताफल की खेती कर अब लाखों का मुनाफा कमा रहे है. वहीं अब तक उनके बगीचे से करीब 11 टन सीताफल की बिक्री हो चुकी है.

संजय कांसे धनगांव के एक छोटे किसान है. पहले पारंपरिक फसल उगाने वाले कांसे ने कुछ अलग करने की सोची और 2016 में उन्होंने अपने आधा एकड़ खेत में सीताफल का बाग लगाया. इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों में मौसम्बी का रोपण किया गया है. जिसमें कांसे ने सोलह बाई सोलह फुट पर 600 पौधे रोपे. इस दौरान सूखाग्रस्त जैसे संकट भी आए. लेकिन उन्होंने इससे निकलने का रास्ता निकाला और बाग़ की साही योजना के साथ देख भाल जारी रखा. अब उनकी मेहनत रंग ला रही है. आज एक पेड़ पर 35 से 40 किलो फल आ रहे हैं.

किसान को मिला रहा है अच्छा रेट

किसान कांसे ने तीन साल से उत्पादन मिल रहा है इस साल आधा एकड़ जमीन में सीताफल की खेती से करीब 20 टन उत्पादन हो सकता है. पंद्रह दिन पहले संजय कांसे का सीताफल पहला और दूसरा फल को छटाई की गई है. इसमें उन्हें 110 रुपये प्रति किलो का रेट मिला है.और सालाना 12 लाख रुपये का अच्छा मुनाफा किसान को मिल रहा है. और अभी तक करीब 11 टन सितपाल की बिक्री हो चुकी है. और 9 से 10 टन अन्य फलों का उत्पादन होने जा रहा है.

कितना आया लगात खर्च

कटाई के चौथे दिन कांसे के खेत में सीताफल खाने के लिए तैयार हो जाता है. एक फल 500 से 700 ग्राम का रहता है. इसकी खेती के लिए किसान ने 80 से 90 हजार रुपए खर्च आया है. इस सीताफल की विशेषता यह है कि इस फसल पर मिलीबग रोग के अलावा और कोई कीटों का प्रकोप नहीं होता है. लेकिन इस साल जब फूल लगाए जा रहे थे तो शुरुआत में बारिश तेज थी इस वजह से फ्रूट रिटेंशन के दौरान बड़ी दिक्कतें हुई थी. लेकिन कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह से किसान कांसे ने सीताफल की खेती में सफल हो गया है.

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