भारी बारिश की चपेट आई बीज किसान राहीबाई,तीन बार बार लगाई सब्जियां की फसल

महाराष्ट्र में इस साल बेमौसम बारिश के कारण किसान बुरी तरह प्रभावित हुए है. किसानों के हाथ लगी तैयार फसल भी बर्बाद हो गई है. वहीं इस बार की हुई भारी बारिश और बेमौसम बारिश के कारण सर्वोच्च पुरस्कार पदम श्री से सम्मानित रही बीजामाता राहीबाई पोपेरे को भी अधिक नुकसान हुआ है. भारी बारिश के कारण उन्हें तीन बार सब्जियों की फसल लगानी पड़ी. उन्हें नवम्बर में वापिस फसल लगानी पड़ रही है क्योंकि बारिश के कारण लगी फसल बर्बाद हो गई. उसके लिए उन्हें घर में सहेजे गए सभी देशी बीजों को खेत में बोना पड़ता है.

इस साल, राज्य के अधिकांश हिस्सों में इस साल भारी बारिश हुई है. कुछ जगहों पर बेमौसम तेज बारिश होने के कारण किसानों की फसल को काफी नुकसान हुआ है. कटी फसल खराब होने से किसान संकट में है. इसी तरह बिजमाता के नाम से पहचानी जाने वाली राहीबाई पोपेरे भी भारी बारिश की चपेट में आ गई हैं. बारिश के कारण सब्जी की फसल खराब होने के कारण उन्हें तीन बार फसल लगानी पड़ी. रहीबाई पोपेरे ने बताया कि इससे फसल को काफी नुकसान हुआ है. मेहनती राहीबाई ने प्रकृति का त्याग किए बिना उत्पादन के लिए तीन बार सब्जियों के बीज बोए हैं. परिवार के सदस्यों को साथ लेकर उन्होंने एक बार फिर विभिन्न फसलों और सब्जियों के बीज पैदा करने में सफलता हासिल की है.

कौन है राहीबाई पोपेरे?

आज महाराष्ट्र का एक भी जिला या गांव ऐसा नहीं है जो राहीबाई पोपेरे को न जानता हो. राहीबाई का काम विदेशों तक भी पहुँचा. सरकार ने भी उनके काम पर ध्यान दिया है. उन्हें सर्वोच्च पुरस्कार पदम श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है. कोई शिक्षा न होते हुए भी राहीबाई ने कृषि के क्षेत्र में स्वदेशी बीज संरक्षण का बहुत बड़ा कार्य किया है. इसके लिए उन्हें कई सारे पुरस्कार भी मिले है.

200 से अधिक बीजों की देशी किस्में

अहमदनगर जिले के अकोले तालुका का कोंभलाने गांव की रहने वाली राहीबाई है. राहीबाई ने इस छोटे से गांव में बहुत अच्छा काम किया है. उनके पास 52 से अधिक फसलों की 200 से अधिक बीज वाली स्वदेशी किस्में हैं. और 114 पंजीकृत किस्में है. दुर्लभ होते जा रहे बीजों की सभी किस्मों को उन्होंने सुरक्षित रखा है. राहीबाई ने गाँव की पुरानी पत्तेदार सब्जियों और वील सब्जियों के बीजों की कई किस्मों को भी संरक्षित किया है. उन्होंने यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय बीज कंपनी से उपलब्ध नहीं की है. राहीबाई सैकड़ों वर्षों से जो बीज रख रही हैं, वे अपने मूल रूप में हैं. उनके पास वाला की केवल बीस किस्में उपलब्ध हैं. साथ ही चावल की भी 16 किस्में है. इसके साथ ही उनके पास रागिनी, मूंग, चना, करले, डोडका, पालक, गोसावला, मेथी, भिंडी, ग्वार, तरह-तरह की सब्जियो की बीज हैं.

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