31 अक्टूबर को होगी MSP समिति की तीसरी बैठक, SKM ने कहा- नहीं होंगे शामिल

इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 22 अगस्त को समिति की पहली बैठक हुई थी. इस बैठक में पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने अनिवार्य विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए तीन आंतरिक उप-समूहों का गठन किया था.

31 अक्टूबर को होगी MSP समिति की तीसरी बैठक, SKM ने कहा- नहीं होंगे शामिल

सांकेतिक फोटो

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समिति की तीसरी बैठक का आयोजन 31 अक्टूबर को भुवनेश्वर में किया जाएगा. इस पैनल में अध्यक्ष सहित कुल 26 सदस्य हैं. जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के प्रतिनिधियों के प्रतिनिधित्व के लिए तीन स्लॉट खाली रखे गए हैं. खास बात यह है कि एसकेएम ने समिति को खारिज करते हुए बैठक से दूर रहने का फैसला किया है. वहीं, समिति के एक सदस्य ने कहा कि तीसरी बैठक आईसीएआर-भारतीय जल प्रबंधन संस्थान में होगी और इसमें विविधीकरण पर चर्चा होगी.

बता दें इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 22 अगस्त को समिति की पहली बैठक हुई थी. इस बैठक में पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने अनिवार्य विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए तीन आंतरिक उप-समूहों का गठन किया था. दूसरी बैठक 27 सितंबर को हैदराबाद में आयोजित की गई थी, जिसमें जैविक खेती पर चर्चा की गई थी. वहीं, कृषि मंत्रालय की 18 जुलाई की अधिसूचना के अनुसार, समिति को ‘प्रणाली को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाकर देश के किसानों को एमएसपी उपलब्ध कराने के संदर्भ में सुझाव’ देने के लिए कहा गया है. यह ‘कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) को अधिक स्वायत्तता देने की व्यावहारिकता और इसे और अधिक वैज्ञानिक बनाने के उपायों’ पर भी सुझाव देगा.

विविधीकरण से संबंधित चार बिंदुओं पर सुझाव देने के लिए कहा गया है

इसके अलावा, यह “घरेलू और निर्यात अवसरों का लाभ उठाकर किसानों को उनकी उपज के लाभकारी मूल्यों के माध्यम से उच्च मूल्य सुनिश्चित करने के लिए बदलती आवश्यकताओं के अनुसार कृषि विपणन प्रणाली को मजबूत करने” की सिफारिशें देगा. समिति को प्राकृतिक खेती के संबंध में पांच बिंदुओं का सुझाव देने के अलावा, मूल्य श्रृंखला विकास के लिए कार्यक्रमों और योजनाओं का सुझाव देना का काम भी सौंपा गया है. साथ ही समिति की यह भी जिम्मेदारी है कि भविष्य की जरूरतों के लिए प्रोटोकॉल सत्यापन और भारतीय प्राकृतिक कृषि प्रणाली के तहत क्षेत्र के विस्तार के लिए प्रचार किया जाए. साथ ही समिति को फसल विविधीकरण से संबंधित चार बिंदुओं पर सुझाव देने के लिए कहा गया है, जिसमें उत्पादक और उपभोक्ता राज्यों के कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों के मौजूदा फसल पैटर्न की मैपिंग शामिल है.

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