फल वैज्ञानिक से जानें आम- लीची के पौधों को पाले से बचाने का उपाय, उत्पादन भी होगा डबल

सर्दी के मौसम में आम के नए बागों के पौधों को पाले से बचाना बहुत ही जरूरी है. जनवरी में नर्सरी में लगे पौधों को पाले से बचाने के लिए उसे घास- फूस से बने छप्पर से ढक देना चाहिए.

फल वैज्ञानिक से जानें आम- लीची के पौधों को पाले से बचाने का उपाय, उत्पादन भी होगा डबल

सांकेतिक फोटो

फल और फसलों की प्रकृति बहुवर्षीय होती है. इनका रखरखाव धान्य फसलों से एकदम भिन्न होता है. ऐसे भी आम और लीची जैसी फल फसलों में फूल फरवरी महीने में ही आ जाते हैं. इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है कि इन फल फसलों की देखभाल कैसे की जाए, ताकि इनके पेड़ों को लगने वाले रोगों से बचाया जा सके. अगर आपने फूल लगने के दौरान सही तरह से ध्यान नहीं दिया तो आम और लीची के उत्पादन पर असर पड़ सकता है. इसलिए आज आपको देश के वरिष्ठ फल वैज्ञानिक डॉक्टर एसके सिंह आम और लीची की खेती करने वालों किसानों के लिए महत्वपूर्ण बातें बता रहे हैं, जिसे आप जरूर पालन करें.

सर्दी के मौसम में आम के नए बागों के पौधों को पाले से बचाना बहुत ही जरूरी है. जनवरी में नर्सरी में लगे पौधों को पाले से बचाने के लिए उसे घास- फूस या पुआल से बने छप्पर से ढक देना चाहिए. पाले से बचाव के लिए बाग में समय-समय पर हल्की सिंचाई भी करते रहना चाहिए. साथ ही पाले से बचाव के लिए बागों की निराई- गुड़ाई एवं सफाई भी करते रहना चाहिए.

ऐसे रखें ध्यान

आम के बड़े पेड़, जिसमें बौर आने वाले हों उसका विशेष ध्यान रखना आवश्यक है. इन्हीं पर फलोत्पादन निर्भर करेगा. जनवरी के पहले सप्ताह में आने वाले बौर में फल नहीं लगते और ये अक्सर गुच्छे का रूप धारण कर लेते हैं. इसलिए ऐसे बौर को काटकर नष्ट कर देना चाहिए. वहीं, आम में उर्वरक देने का सही समय जून से लेकर 15 सितंबर तक है. इस समय 10 वर्ष या 10 वर्ष से बड़े आम के पेड़ों में नाइट्रोजन 500 ग्राम, फॉस्फोरस 500 ग्राम तथा पोटाश 750 ग्राम प्रति पौधा तत्व के रूप में प्रयोग करें. इन्हें मिट्टी में मिलाकर हल्की सिंचाई कर दें. फिर, बागों की निराई-गुड़ाई एवं सफाई का कार्य करें.

बाग की ऊपरी सतह की बहुत हल्की गुड़ाई करें

दिसंबर के अंत में बाग की ऊपरी सतह की बहुत हल्की गुड़ाई करके खर पतवार मुक्त करने के बाद आम के बाग में मीलीबग (गुजिया) के बचाव के लिए आम के तने पर पॉलीथीन की 2.5 से लेकर 3 फुट चौड़ी पट्टी बांध दें. साथ ही 250 ग्राम प्रति वृक्ष की दर से क्लोरपॉयरीफॉस धूल प्रति पेड़ कैनोपी के अनुसार पेड़ के चारों ओर की मिट्टी में मिला देना चाहिए. इसके अतिरिक्त, भूमि की सतह पर परभक्षी ब्यूवेरिया बेसियाना (2 ग्राम प्रति लीटर, 1×10 पावर 7 बीजाणु प्रति मिलीलीटर अथवा 5 प्रतिशत नीम बीज के गिरी सतत् का प्रयोग प्रौढ़ कीटों को मारने के लिए करें.

छिड़काव करने से वातावरण का तापमान कुछ बढ़ जाता है

फरवरी में पेड़ के चारों तरफ खूब अच्छी तरह से निराई गुड़ाई करें. मैंगो हॉपर (फुदका ) के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड की 1मिली लीटर दवा को प्रति दो लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. साथ ही चूर्णिल आसिता रोग से बचाव के लिए केराथेन नामक फफुंदनाशक की एक मिलीलीटर ग्को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव फरवरी के अंतिम सप्ताह में अवश्य करें. तापमान कम होने की वजह से यदि मंजर कम निकल रहा हो तो कैराथेन नामक फफुंदनाशक के स्थान पर घुलनशील गंधक की 3 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से वातावरण का तापमान कुछ बढ़ जाता है, जिसकी वजह से मंजर भी खुलकर आता है. साथ ही उसमें पावडरी मिल्डीव रोग भी नहीं लगता है.

ध्यान रखने योग्य बात है कि इन्हीं दिनों पौधों पर फूल आते हैं और यदि किसी भी कीटनाशी का प्रयोग फूलों पर किया गया तो परागण करने वाले कीट बाग में नहीं आयेंगे, जिसकी वजह से संपूर्ण परागण न होने से कम फल लगेंगे. फरवरी में छोटे आम के पौधों के ऊपर से छप्पर हटा दें.

लीची की देखभाल

आम के बाग के प्रबंधन के लिए बताए गए उपायों को लीची के बाग में भी प्रबंधन के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं. जनवरी में पाले से सुरक्षा का प्रबंधन अवश्य करें. फरवरी महीने में लीची में फूल आते हैं. ऐसे में उस दौरान उसकी सिंचाई न करें, क्योंकि इससे फूलों के गिरने की आशंका बढ़ जाती है. फूल आने से पहले एवं बाद में पानी की समुचित व्यवस्था करें. चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप से बचने के लिए लीची में संस्तुत रसायनों का प्रयोग करें. कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट की आधी मात्रा यानी 1.5 किग्रा प्रति पौधा फरवरी में प्रयोग करें. इस दौरान लीची के नवरोपित बागों की सिंचाई करें. बागों की निराई-गुड़ाई एवं सफाई का कार्य करें.

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